logo
Home Reference Criticism & Interviews Stree Kavita : Paksh Aur Pariprekshya - 1
product-img
Stree Kavita : Paksh Aur Pariprekshya - 1
Enjoying reading this book?

Stree Kavita : Paksh Aur Pariprekshya - 1

by Rekha Sethi
4.6
4.6 out of 5

publisher
Creators
Author Rekha Sethi
Publisher Rajkamal Prakashan
Synopsis एक मानवीय इकाई के रूप में स्त्री और पुरुष, दोनों अपने समय व यथार्थ के साझे भोक्ता हैं लेकिन परिस्थितियाँ समान होने पर भी स्त्री-दृष्टि दमन के जिन अनुभवों व मन:स्थितियों से बन रही है, मुक्ति की आकांक्षा जिस तरह करवटें बदल रही है, उसमें यह स्वाभाविक है कि साहित्यिक संरचना तथा आलोचना, दोनों की प्रणालियाँ बदलें। स्त्री-लेखन स्त्री की चिन्तनशील मनीषा के विकास का ही ग्राफ है जिससे सामाजिक इतिहास का मानचित्र गढ़ा जाता है और जेंडर तथा साहित्य पर हमारा दिशा-बोध निर्धारित होता है। भारतीय समाज में जाति एवं वर्ग की संरचना जेंडर की अवधारणा और स्त्री-अस्मिता को कई स्तरों पर प्रभावित करती है। स्त्री-कविता पर केन्द्रित प्रस्तुत अध्ययन जो कि तीन खंडों में संयोजित है, स्त्री-रचनाशीलता को समझने का उपक्रम है, उसका निष्कर्ष नहीं। पहले खंड, 'स्त्री-कविता : पक्ष और परिप्रेक्ष्य' में स्त्री-कविता की प्रस्तावना के साथ-साथ गगन गिल, कात्यायनी, अनामिका, सविता सिंह, नीलेश रघुवंशी, निर्मला पुतुल और सुशीला टाकभौरे पर विस्तृत लेख हैं। एक अर्थ में ये सभी वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य में विविध स्त्री-स्वरों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनकी कविता में स्त्री-पक्ष के साथ-साथ अन्य सभी पक्षों को आलोचना के केन्द्र में रखा गया है, जिससे स्त्री-कविता का बहुआयामी रूप उभरता है। दूसरा खंड, 'स्त्री-कविता : पहचान और द्वन्द्व' स्त्री-कविता की अवधारणा को लेकर स्त्री-पुरुष रचनाकारों से बातचीत पर आधारित है। इन रचनाकारों की बातों से उनकी कविताओं का मिलान करने पर उनके रचना-जगत को समझने में तो सहायता मिलती ही है, स्त्री-कविता सम्बन्धी उनकी सोच भी स्पष्ट होती है। स्त्री-कविता को लेकर स्त्री-दृष्टि और पुरुष-दृष्टि में जो साम्य और अन्तर है उसे भी इन साक्षात्कारों में पढ़ा जा सकता है। तीसरा खंड, 'स्त्री-कविता : संचयन' के रूप में प्रस्तावित है...। इन सारे प्रयत्नों की सार्थकता इसी बात में है कि स्त्री-कविता के माध्यम से साहित्य और जेंडर के सम्बन्ध को समझते हुए मूल्यांकन की उदार कसौटियों का निर्माण हो सके जिसमें सबका स्वर शामिल हो।

Enjoying reading this book?
PaperBack ₹299
HardBack ₹695
Print Books
Digital Books
About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Pages: 238
  • Binding: PaperBack
  • ISBN: 9789389577228
  • Category: Criticism & Interviews
  • Related Category: Politics & Current Affairs
Share this book Twitter Facebook
Related articles
Related articles
Related Videos


Suggested Reads
Suggested Reads
Books from this publisher
Andar Ki Aag by Shankar Shailendra
Meghdoot : Ek Purani Kahani by Hazariprasad Dwivedi
Tanashahi Se Lokshahi by AnilYadav ‘Jaihind’
Mulk by Anubhav Sinha
Shri Ramayana Mahanveshanam : Vol. : 2 by M. Veerappa Moily
Naurangi Bimar Hai by Shekhar Joshi
Books from this publisher
Related Books
Sang Satsang Namvar Singh
Uma Nehru Aur Striyon Ke Adhikar Pragya Pathak
Stree Kavita : Paksh Aur Pariprekshya - 1 Rekha Sethi
Stree Kavita : Pahachan Aur Dwandwa - 2 Rekha Sethi
Chandrakanta (Santati) Ka Tilism Wagish Shukla
Stree Kavita : Pahachan Aur Dwandwa - 2 Rekha Sethi
Related Books
Bookshelves
Stay Connected