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Suraj Prakash

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कहानी लेखक, उपन्यासकार और एक सक्षम अनुवादक के रूप में जाने जाने वाले सूरज प्रकाश का जन्म देहरादून, उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री प्राप्त की और बाद में उस्मानिया विश्वविद्यालय से एमए किया। सूरज प्रकाश ने शुरू में कई नौकरियां कीं और अंततः 1981 में भारतीय रिजर्व बैंक की सेवा में बॉम्बे चले गए और 2012 में वहां से महाप्रबंधक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। 1989 में वे नौकरी में सज़ा के रूप में अहमदाबाद भेजे गये लेकिन उन्‍होंने इस सज़ा को भी अपने पक्ष में मोड़ लिया और अपने लेखन करियर की शुरुआत की। अहमदाबाद में बिताए 75 महीनों में उन्‍होंने अपने व्‍यक्‍तित्‍व और लेखन को संवारा और कहानी लेखन में अपनी जगह बनानी शुरू की। खूब पढ़ा और खूब यात्राएं कीं। उन्होंने एक चुनौती के रूप में गुजराती सीखी और पंजाबी वक्ता होने के बावजूद गुजराती से कई पुस्तकों का अनुवाद किया। इनमें व्यंग्य लेखक विनोद भट्ट की कुछ पुस्तकों के अनुवाद, हसमुख बरारी का नाटक राय न दर्पण राय और दिनकर जोशी का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास प्रकाशनो पढ़ाचायो शामिल हैं। उन्होंने जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास एनिमल फार्म का भी अनुवाद किया। गुजरात हिंदी साहित्य अकादमी का पहला सम्मान 1993 में सूरज प्रकाश को प्रदान किया गया था। सूरज प्रकाश हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी,...

गुजराती, मराठी भाषा जानते हैं। वह इन दिनों मुंबई में रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी मधु अरोड़ा और दो बेटे अभिजीत और अभिज्ञान हैं।

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SURAJ PRAKASH: SANKALIT KAHANIYAN

Hindi

इन कहानियों को पढ़ते समय आप एक ऐसे आनंद लोक से गुजरते हैं जिसकी भावनाएं कोमल हैं और स्वच्छ हैं। कथाकार की इन कहानियों में महानगर का असली चेहरा झांकता नहीं बहुत कुछ कहता भी है जिसमे एक दर्द, एक उल्लास और जीवन को तसल्ली से देखने का एक चश्मा भी यहां विकसित होता दिखाई देता है। इन कहानियों के पात्र काल्पनिक नहीं हैं वरन समाज के वे रेखाचित्र हैं जिनसे समाज का हर व्यक्ति आत्मसात करता रहता है। रोज़मर्रा की ज़द्दोज़हद, संघर्ष, प्रेम, विसंगतियां, तनाव आदि कई ऐसे विषय हैं जिसे लेखक ने शिद्दत से जिया है और ऐसे अनछुए पहलुओं को प्रकाश में लाने का जोखिम भी उठाया है जिसे रचनाकार प्रायः प्रकाश में लाने से हिचकते या घबराते हैं।

ISBN: 9788123773582

MRP: 375

Language: Hindi

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