Bhagwant Anmol

Introduction

Bhagwant Anmol (born 30 August 1990) is a Hindi best-selling author and speaker. He is one of the few writers known to write on new topics. He holds a software engineer degree from Maharana Pratap Engineering College. Bhagwant's Kanpur-based institution 'Indian Institute of Speech Therapy', which suffered from the problem of stammering in childhood, is a trusted name to overcome the problem of stammering.

 

Writings & Awards

Bhagwant Anmol is one of the few writers who are known to write on new subjects. He is loved by critics as well as readers. He is the only young Hindi writer who is loved by researchers and universities. Many students have submitted their research papers in his books and 'Zindagi 50-50' is included in the syllabus of some universities. His book Bali Umar is quite popular among readers. His book 'Zindagi 50-50' has been a Jagran-Nielsen bestseller thrice and has been awarded by the Uttar Pradesh Hindi Sansthan.

His first novel "Ek Rishta Benam Sa.." was published in October 2013 by Sahitya Sanchar Prakashan, New Delhi in 2013. His first motivational book Kaamyaab Ke Anmol Rahasya was published by Indra Publishing House on 1 January 2015. The Marathi translation of the same book 'Yashache Anmol Rahasya' was published in January 2017.

His second motivational book 'Tumhe Jeetna Hi Hoga' is co-authored by Motivational Speaker and Entrepreneur Shri Arunendra Soni published by Indra Publishing House, Bhopal. His fourth and most respected book 'Zindagi 50-50' has been published by 'Rajpal & Sons'. The book has been a Jagran-Nielsen Bestseller for three consecutive times and has been awarded by the Uttar Pradesh Hindi Sansthan. Many students have submitted their research papers on this book and it has also been included in the syllabus of some universities.

After this, his next books 'Bali Umar' also became very popular, it was also published by 'Rajpal and Sons'.

 

Latest Book

His latest book ‘Pramey’ is a science fiction. ‘Pramey’ is the story of a young man who has been brought up in a religious environment and is studying technology. Where on the one hand technology tells that there is no God in this universe, on the other hand his family has taught since childhood that everything in the world is only a gift of God. His mind gets stuck in this duality. The urge to come out of this duality is 'Pramey'. Like all the previous books, it has also been taken by the readers and is gaining a lot of popularity.

 


 

परिचय 

भगवंत अनमोल (जन्म 30 अगस्त 1990) हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक और वक्ताओं में से एक हैं। वह उन कुछ लेखकों में से एक हैं जो नए विषयों पर लिखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डिग्री  हासिल की है। बचपन में हकलाहट की समस्या से ग्रस्त रहे भगवंत की कानपुर स्थित संस्था  'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पीच थेरेपी' हकलाहट की समस्या दूर करने के लिए एक विश्वसनीय नाम है।  

 

लेखन व सम्मान 

भगवंत अनमोल  उन कुछ लेखकों में से एक हैं जो नए विषयों पर लिखने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें आलोचकों के साथ-साथ पाठकों द्वारा भी प्यार किया जाता है। वे एकमात्र युवा हिंदी लेखक हैं जिन्हें शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों द्वारा पसंद किया जाता है। उनकी किताबों में कई छात्रों ने अपने शोध पत्र जमा किए हैं और कुछ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में 'जिंदगी 50-50' शामिल है। उनकी किताब बाली उमर पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय है। उनकी  किताब 'जिंदगी 50-50' तीन बार जागरण-नीलसन बेस्ट सेलर रही है और इसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया है। 

उनका पहला उपन्यास "एक रिश्ता बेनाम सा.." अक्टूबर 2013 में साहित्य संचार प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा 2013 में प्रकाशित हुआ था । उनकी पहली प्रेरक पुस्तक कामयाबी के अनमोल रहस्य 1 जनवरी 2015 को इंद्रा पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित की गई थी।  इसी किताब का मराठी अनुवाद 'यशाचे अनमोल रहस्य' जनवरी 2017 में प्रकाशित हुआ था। 

उनकी दूसरी प्रेरक पुस्तक 'तुम्हें जीतना ही होगा' के सह लेखक प्रेरक वक्ता और उद्यमी श्री अरुणेंद्र सोनी हैं इंद्रा प्रकाशन हाउस, भोपाल द्वारा प्रकाशित किया गया है। उनकी चौथी और सर्वाधिक सम्मानित पुस्तक 'जिंदगी 50-50' का प्रकाशन 'राजपाल एंड संस' द्वारा  किया गया है। यह पुस्तक लगातार तीन बार जागरण-नीलसन बेस्ट सेलर रही है और इसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया है। कई छात्रों ने इस पुस्तक पर अपने शोध पत्र जमा किए हैं और इसे कुछ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। 

इसके बाद आई उनकी अगली किताबें 'बाली उमर' भी बेहद लोकप्रिय हुई इसे भी 'राजपाल एंड संस' ने प्रकाशित किया था। 

 

नवीनतम किताब 

प्रमेय एक साइंस फिक्शन है।  यह एक जो 'प्रमेय' एक ऐसे युवा की कहानी है जिसकी परवरिश धार्मिक माहौल में हुई है और वह प्रौद्योगिकी की पढ़ाई कर रहा है। जहाँ एक तरफ़ तकनीकी यह बताती है कि इस ब्रह्माण्ड में ईश्वर है ही नहीं तो दूसरी तरफ़ उसके परिवार ने बचपन से यह सिखाया है कि दुनिया की हर एक वस्तु सिर्फ़ ईश्वर की देन है। उसका मन इस द्वंद्व में फंसकर रह जाता है। इसी द्वंद्व से निकलने की छटपटाहट है 'प्रमेय'।  पिछली सभी किताबों की तरह इसे भी पाठकों ने हाथों हाथ लिया है और खासी लोकप्रियत बटोर रही है। 

 

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