logo
Home Literature Literature Zindagi 50-50
product-img product-img
Zindagi 50-50
Enjoying reading this book?

Zindagi 50-50

by Bhagwant Anmol
4.1
4.1 out of 5

publisher
Creators
Author Bhagwant Anmol
Publisher Rajpal and Sons
Synopsis भावनाएँ, ज़रूरतें, महत्वाकांक्षाएँ-ये सब एक स्त्री की-लेकिन शरीर-पुरुष का! एक बेहद दर्दनाक परिस्थिति जिसमें ज़िन्दगी, ज़िन्दगी नहीं, समझौता बनकर रह जाती है। ऐसे इन्सान और उसके घरवालों को हर मकाम पर समाज के दुव्र्यवहार और ज़िल्लत का सामना करना पड़ता है। अनमोल इस बात को अच्छी तरह समझता है क्योंकि उसकी अपनी एकमात्र सन्तान और छोटा भाई, दोनों की यही वास्तविकता है, दोनों किन्नर हैं। भाई को पल-पल पिसते, घर और बाहर प्रताड़ित और अपमानित होते हुए देख अनमोल यह दृढ़ निश्चय करता है कि वह अपने बेटे को अधूरी ज़िन्दगी नहीं, बल्कि भरपूर ज़िन्दगी जीने के लिए हर तरह से सक्षम बनायेगा! लेकिन क्या वह ऐसा कर पाता है...पढ़िये इस उपन्यास में। ‘‘...भगवंत अनमोल...ऐसे युवा साहित्यकारों की फेहरिस्त काफ़ी लम्बी है जिन्होंने अपनी वास्तविक प्रेम कहानी लिखी और सेलेब्रिटी राइटर बन गये।’’ -दैनिक जागरण-डिज़ायर मैगज़ीन ( ई-एडिशन ), 4 मार्च 2015 ‘‘कुछ हिन्दी लेखकों ने बड़े-बड़े अंग्रेज़ी लेखकों को पीछे छोड़ दिया है। उन्हीं में से एक, भगवंत अनमोल, युवाओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं।’’ -दैनिक जागरण, फरवरी 2015

Enjoying reading this book?
PaperBack ₹265
Print Books
Digital Books
About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Rajpal and Sons
  • Pages: 208
  • Binding: PaperBack
  • ISBN: 9789386534132
  • Category: Literature
  • Related Category: Literature
Share this book Twitter Facebook


Suggested Reads
Suggested Reads
Books from this publisher
Googly by Gyanesh Sahu
Kavita Sadi by Suresh Salil
Nisha Nimantran by Harivansh Rai Bachchan
Cheen Diary by Rituraj
Mutthi Bhar Yadeein by Ruskin Bond
Honeymoon by Patrick Modiano
Books from this publisher
Related Books
Pramey Bhagwant Anmol
Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari - Nazir Akbarabadi Prakash Pandit
Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari - Akhtar Sheerani Prakash Pandit
Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari - Faiz Ahmad Faiz Prakash Pandit
Sargam Firaq Gorakhpuri
Dekh Kabira Roya Bhagwatisharan Mishra
Related Books
Bookshelves
Stay Connected