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Sahitya Sahchar
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Sahitya Sahchar

by Hazariprasad Dwivedi
4.6
4.6 out of 5

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Creators
Publisher Lokbharti Prakashan
Synopsis साहित्यिक पुस्तकें हमें सुख-दुःख -र की व्यक्तिगत संकीर्णता और- दुनियावी झगड़ों : से ऊपर ले जाती है और सम्पूर्ण मनुष्य जाति के-और भी आगे बढ़कर प्राणिमात्र के-दुःख-शोक, राग-विराग । .आह्वाद- आमोद को समझने .की' सहानुभूतिमय दृष्टि देती है । वे पाठक के हृदय को इस प्रकार कोमल और सवेदनशील बनाती है .किवह' अपने क्षुद्र स्वार्थ र को भूलकर अशिवों के सुख-दुःख को अपना? समझने ,, लगता. है-सारी दुनियाँ के साथ ?r अहलीका, का र - अनुभव करने लगता है । - ''' ........ ?... .. .एक शब्द में इस प्रकार के साहित्‍य को 'रचनात्मक साहित्य' कहा जा सकता है।, क्योंकि ऐसी पुस्तकें हमारे ही ? अनुभवीके, ताने-बाने से एक नये रस-लोक, की रचना करती है 1 इस प्रकार की पुस्तकों को ही, संक्षेप में 'साहित्य' कहते हैं ।. साहित्य शब्द का विशिष्ट अर्थ यही है । प्रस्‍तुत पुस्तक में इस श्रेणी की पुस्तकों के अध्ययन करने का तरीका बताना ही आचार्य द्विवेदी जी का संकल्प. हैं ।

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Binding: HardBack
About the author डॉ. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (19 अगस्त, 1907 - 19 मई, 1979) हिन्दी के शीर्षस्थ साहित्यकारों में से हैं। वे उच्चकोटि के निबन्धकार, उपन्यासकार, आलोचक, चिन्तक तथा शोधकर्ता हैं। साहित्य के इन सभी क्षेत्रों में द्विवेदी जी अपनी प्रतिभा और विशिष्ट कर्तव्य के कारण विशेष यश के भागी हुए हैं। द्विवेदी जी का व्यक्तित्व गरिमामय, चित्तवृत्ति उदार और दृष्टिकोण व्यापक है। द्विवेदी जी की प्रत्येक रचना पर उनके इस व्यक्तित्व की छाप देखी जा सकती है। द्विवेदी जी के निबंधों के विषय भारतीय संस्कृति, इतिहास, ज्योतिष, साहित्य विविध धर्मों और संप्रदायों का विवेचन आदि है। वर्गीकरण की दृष्टि से द्विवेदी जी के निबंध दो भागों में विभाजित किए जा सकते हैं - विचारात्मक और आलोचनात्मक। विचारात्मक निबंधों की दो श्रेणियां हैं। प्रथम श्रेणी के निबंधों में दार्शनिक तत्वों की प्रधानता रहती है। द्वितीय श्रेणी के निबंध सामाजिक जीवन संबंधी होते हैं। आलोचनात्मक निबंध भी दो श्रेणियों में बांटें जा सकते हैं। प्रथम श्रेणी में ऐसे निबंध हैं जिनमें साहित्य के विभिन्न अंगों का शास्त्रीय दृष्टि से विवेचन किया गया है और द्वितीय श्रेणी में वे निबंध आते हैं जिनमें साहित्यकारों की कृतियों पर आलोचनात्मक दृष्टि से विचार हुआ है। द्विवेदी जी के इन निबंधों में विचारों की गहनता, निरीक्षण की नवीनता और विश्लेषण की सूक्ष्मता रहती है।
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Pages: 148
  • Binding: HardBack
  • ISBN: 9788180317750
  • Category: Criticism & Interviews
  • Related Category: Politics & Current Affairs
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