logo
Home Literature Poetry Pannon Par Kuch Din
product-img product-imgproduct-img
Pannon Par Kuch Din
Enjoying reading this book?

Pannon Par Kuch Din

by Namwar Singh
4.8
4.8 out of 5

publisher
Creators
Author Namwar Singh
Publisher Vani Prakashan
Editor Vijay Prakash Singh
Synopsis इन दो अलग-अलग कालखण्डों की डायरी से गुज़रने पर ऐसा लगता है कि यह विद्यार्थी नामवर सिंह से शोधार्थी नामवर सिंह की यात्रा का एक संक्षिप्त साहित्यिक वृत्तान्त है। उनके एकान्त के क्षणों का चिन्तन, अपने मित्रों, गुरुओं तथा उस समय के उभरते हुए साहित्यकारों के साथ बौद्धिक-विमर्शसब कुछ इन दोनों डायरियों में दर्ज है। इन डायरियों को उस समय के साहित्यिक वातावरण का दर्पण भी कहा जा सकता है। बनारस और इलाहाबाद उस समय साहित्य, संगीत और कला की उर्वर भूमि थे। साहित्य की बहुत-सी प्रसिद्ध हस्तियाँ इन शहरों की देन थीं, जिनका इन शहरों से लगाव भी बराबर बना रहा। इन शहरों के उस कालखण्ड पर नज़र डालें, तो मशहूर ग्रीक कवि कवाफ़ी का यह वाक्य याद आता है- “हम किसी शहर में नहीं, समय विशेष में रहते हैं और समय?' ये शहर तो आज भी हैं, लेकिन वह समय, वे लोग, वह वातावरण अब पहले की तरह नहीं हैं। नामवर सिंह को बेहतर जानने और समझने की जिज्ञासा रखने वालों के लिए पन्नों पर कुछ दिन पुस्तक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ हो सकती है।

Enjoying reading this book?
Hardback ₹399
Paperback ₹299
Print Books
About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Pages: 152
  • Binding: Hardback
  • ISBN: 9789390678433
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
Share this book Twitter Facebook


Suggested Reads
Suggested Reads
Books from this publisher
Skandgupt Vikramaditya by Jaishankar Prasad
Vigyan Patrakarita by Dr. Manoj Patairiya
Sampoorna Panchatantra by Acharya Vishnu Sharma
Indhan by Swayam Prakash
Durghatna by Mahashweta Devi
Mere Bhai Mere Dost by Daya Prakash Sinha
Books from this publisher
Related Books
Sakhuntakiya Namwar Singh
Pannon Par Kuch Din Namwar Singh
Namwar Ki Drishti Mein Muktibodh Namwar Singh
Sakhuntakiya Namwar Singh
Related Books
Bookshelves
Stay Connected