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KALYUG KA ANT
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KALYUG KA ANT

by Prawin Kumar
4.9
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Creators
Author Prawin Kumar
Publisher Rigi Publication
Synopsis बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला अन्तर्गत उमापत वसंत गाँव में जन्में एवं वर्तमान में रेल डिब्बा कारखाना,कपूरथला में वरिष्ठ अनुभाग अभियंता के पद पर कार्यरत श्री प्रवीण कुमार के परिवार में चार भाईयों के अलावा पिता -श्री गंगाधर झा ,माता -श्रीमती शशि देवी ,पत्नी -श्रीमती सुषमा झा एवं पुत्र -प्रियांशु झा हैं। अति व्यस्त ड्यूटी के बावजूद इन्हें हिन्दी लेखन के लिए भारतीय रेल द्वारा कई पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं । 'कलियुग का अंत' एक काव्य रचना है, जिसमें 'कलियुग' युग का प्रतिनिधित्व करता है, और संसार के सभी दुष्ट ,अनाचारी और सामर्थ्यशाली लोगों का नायक है। विधि के विधान के अनुसार 'कलियुग' सभी यंत्रों एवं तत्रों से सुसज्जित और अजेय है। जब कलियुग में आसुरी प्रवृत्ति के लोगों के पाखण्ड से धरती त्राहि -त्राहि करने लगी तब ईश्वर ने युग के पाखण्ड का भेद खोलने शिव के आधे अंश यानि शव (शक्तिविहीन शिव ) को लाचार रूप में धरती पर भेजा ताकि दुनियाँ को दिखाया जाये कि स्वार्थ में दिन -रात ईश्वर के सामने फ़ैलने वाले हाथ जब ईश्वर को लाचार देखते हैं तो कैसा व्यवहार करते हैं ? काव्य में सुर -असुर के संघर्ष की सांकेतिक गाथा है ,जिसे अर्थ पाने के लिए 'कलियुग' के अंत का इंतजार है । निश्चय ही हिन्दू धर्म की अवधारणा के अनुसार कालांतर असुरों के अंत के बाद नए युग द्वारा असुरों द्वारा प्रताड़ित शिव के शव को श्री हरि सहित पाँच देवताओं के प्रयासों के कारण अलग - अलग अवतारों में महिमा मंडित किया जाएगा ,साथ ही उनका जन्म स्थान भी एक तीर्थस्थान के रूप में विश्व विख्यात हो जाएगा । काव्य में देव ,असुर सभी युग के अनुरूप हैं ,साथ ही विज्ञान और तर्क दोनों की दृष्टि से व्यवहारिक भी हैं। काव्य में सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया गया है । प्रवीण कुमार का मानना है कि बहुत बातें जो हम विभिन्न वजहों से नहीं कह पाते हैं ,काव्य में संकेतों के माध्यम से बिना लक्ष्मण रेखा उल्लंघन के कह जाते हैं ।

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Paperback ₹110
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About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Rigi Publication
  • Pages: 38
  • Binding: Paperback
  • ISBN: 9789389540000
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
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