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Kahin main nirvastra to nahi
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Kahin main nirvastra to nahi

by Yatindra Manju Pandey
4.6
4.6 out of 5
Creators
Author Yatindra Manju Pandey
Publisher Anjuman Prakashan
Synopsis ये कविताएँ अनुभव, शिकायत, प्यार, तकरार, अवसाद, डर, नफरत और ऐसे ही जीवन में मिलने वाले लगभग सभी अहसासों का संगठन हैं। जहाँ कुछ कविताएँ समाज की व्याख्या करेंगी, तो कुछ प्रेम की और कुछ कवि की कल्पनओं की। ये कविताएँ, शारीरिक ढाँचे में जड़े इंसानों और उनके अन्दर वास करती आत्मा के बीच का द्वंद्व भी हैं। सुनते हैं कि पुरुष, औरत के ज़ज्बात को नहीं समझ सकता और न ही उनके उस छोटे-छोटे अहसास को, जिससे वो रोज गुजरती हैं। यही शिकायत पुरुषों को भी स्त्रियों से है कि स्त्री, पुरुषों के गम्भीर आचारण की वजह से उनके मार्मिकता को नहीं समझ पातीं। यहाँ सारी लड़ाई समझ की ही तो है, परन्तु अगर आपकी आत्मा साफ होगी, आपका मन सच्चा होगा, तो आपको लिंगीय आवरण की आवश्यकता नहीं होगी। आप सभी को समझ सकेंगे। ये किताब कविताओं का एक कमरा है जहाँ ज़िन्दगी के सारे अहसास छुपे बैठे हैं। वो एक स्त्री के भी हैं और पुरुष के भी।

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Paperback ₹150
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About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Anjuman Prakashan
  • Pages: 112
  • Binding: Paperback
  • ISBN: 9789386027979
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
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