logo
Home Reference Language & Essay Deh Ki Munder Par
product-img product-imgproduct-img
Deh Ki Munder Par
Enjoying reading this book?

Deh Ki Munder Par

by Gagan Gill
4.8
4.8 out of 5

publisher
Creators
Author Gagan Gill
Publisher Vani Prakashan
Synopsis हर देह एक मुँडेर है। उसकी सीमा से आगे संसार शुरू होता है। संसार, जिसका रहस्य, जिसमें अपनी उपस्थिति का आशय, हमें समझना होता है। स्त्री हो, तो उसे हरदम ध्यान रखना होता है, कहीं उलच न जाये, गिर न जाये। ऐसा नहीं कि पुरुष जीवन कोई आसान जीवन है, फिर भी। मैंने इस संसार को स्त्री की आँख से ही देखा है। मेरी संज्ञा का कोई पक्ष नहीं जो स्त्रीत्व से अछूता हो। फिर भी मैं ‘मात्र स्त्री नहीं, जैसे चिड़िया केवल चिड़िया नहीं, मछली केवल मछली नहीं। हमारे होने का यही रहस्यमय पक्ष है। जो हम नहीं हैं, उस न होने का अनुभव भी हमारे भीतर कहाँ से आ जाता है? इस पुस्तक के निबन्ध साहित्यिक आयोजनों के सम्बोधन के रूप में लिखे गये कुछ प्रसंग हैं। हर सभा के अलग श्रोता, अलग जिज्ञासु । जब इन्हें लिखा गया था, तब कभी सोचा नहीं था, एक दिन ये किसी पुस्तक में एक-दूसरे की अगल-बगल होंगे। कि अनायास ही ये आपस में बहस करते दिखेंगे। वह बहस ही क्या, जो अपने साथ न हो ? शायद इनसे कोई बात निकलती हो, बनती हो। -गगन गिल

Enjoying reading this book?
HardBack ₹395
PaperBack ₹295
Print Books
About the author
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Pages:
  • Binding: HardBack
  • ISBN: 9789388434362
  • Category: Language & Essay
  • Related Category: Arts / Humanities
Share this book Twitter Facebook


Suggested Reads
Suggested Reads
Books from this publisher
Kisan - Aatmhatya : Yatharth Aur Vikalp by
Sharanam by Narendra Kohli
Nazmein Intzar Ki... by Smita Parikh
Uttar Adhunik Media Technique by Harshdev
Sangeet Ke Jawaharat by Ustad Muhammad Saeed Khan
Ram Path Ke Mandir by Sitaram Gurumurty
Books from this publisher
Related Books
Sansaar Mein Nirmal Verma Gagan Gill
Sansaar Mein Nirmal Verma Gagan Gill
Deh Ki Munder Par Gagan Gill
Ityadi Gagan Gill
Main Jab Tak Aai Bahar Gagan Gill
Dilli Mein Uninde Gagan Gill
Related Books
Bookshelves
Stay Connected