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Aisa Bhi Socha Jata Hai
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Aisa Bhi Socha Jata Hai

by Harishankar Parsai
4.6
4.6 out of 5

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Creators
Publisher Vani Prakashan
Synopsis हरिशंकर परसाई उन व्यंग्यकार लेखकों में से हैं जिनके बिना हिन्दी के आधुनिक व्यंग्य लेखन की प्रतिष्ठा सम्भव नहीं होती । उनके व्यंग्य लेखन ने हमारे समाज की तकलीफों को उजागर करने के साथ-साथ मानवीय सहानुभूति, संवेदना और करुणा को भी रेखांकित किया है । वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ऐसा व्यंग्य लिख पाना दुर्लभ है । हरिशंकर परसाई विचारक और चिन्तक भी हैं । एक प्रखर सामाजिक चेतना और सघन आन्तरिक उनके वैचारिक लेखन की विशिष्ट पहचान है । उनका गम्भीर लेखन अपने आसपास के जाने-अनजाने सत्य को बहुत बारीक तथ्य से अभिव्यक्त करता है । `ऐसा भी सोचा जाता है` में संकलित परसाई जी के गम्भीर वैचारिक लेखों में राजनीतिक,सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विषय-सन्दर्भों पर महत्वपूर्ण विचार-चिन्तन है, जिनमें आज के आम आदमी की पीड़ा और संघर्षशीलता के कई आयामों से पाठकों का साक्षात्कार होता है । कहने की जरूरत नहीं है कि `परसाई` और `व्यंग्य` तो एक-दूसरे के पर्याय हैं

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HardBack ₹250
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About the author हरिशंकर परसाई (22 अगस्त, 1924 - 10 अगस्त, 1995) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंगकार थे। उनका जन्म जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के पहले रचनाकार हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और उसे हल्के–फुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा। उनकी व्यंग्य रचनाएँ हमारे मन में गुदगुदी ही पैदा नहीं करतीं बल्कि हमें उन सामाजिक वास्तविकताओं के आमने–सामने खड़ा करती है, जिनसे किसी भी व्यक्ति का अलग रह पाना लगभग असंभव है। लगातार खोखली होती जा रही हमारी सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था में पिसते मध्यमवर्गीय मन की सच्चाइयों को उन्होंने बहुत ही निकटता से पकड़ा है। सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी जीवन–मूल्यों की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने सदैव विवेक और विज्ञान–सम्मत दृष्टि को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा–शैली में खास किस्म का अपनापा है, जिससे पाठक यह महसूस करता है कि लेखक उसके सामने ही बैठा है ।
Specifications
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Pages: 160
  • Binding: HardBack
  • ISBN: 9789350002704
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
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