Mroo Mroo
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Product description: Mroo is written by Mahashweta devi and published by Vani prakashan. Buy Mroo by Mahashweta devi from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Mroo

by Mahashweta devi

  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani prakashan
  • Pages: 192
  • Binding: Hardback
  • ISBN: 9789350009734
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
  • MBIC: MMB3919623

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Author Synopsis
जन्म : 1926, ढाका।

पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे।

शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.।

अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन।

कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित।

हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल के दावेदार, अग्निगर्भ, अक्लांत कौरव, 1084वें की माँ, श्री श्रीगणेश महिमा, टेरोडैक्टिल, दौलति, ग्राम बांग्ला, शालगिरह की पुकार पर, भूख, झाँसी की रानी, आंधारमानिक, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, मातृछवि, सच-झूठ, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, भटकाव, नीलछवि, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, बनिया-बहू, नटी (उपन्यास); पचास कहानियाँ, कृष्णद्वादशी, घहराती घटाएँ, ईंट के ऊपर ईंट, मूर्ति, (कहानी-संग्रह); भारत में बँधुआ मजदूर (विमर्श)।

सम्मान : ‘जंगल के दावेदार’ पुस्तक पर ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। ‘मैगसेसे अवार्ड’ तथा ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित।

निधन : 28-07-2016 (कोलकाता)।
म्रू’ नाम पश्चिम बंगाल में, आदिवासियों के 38 वें वर्ग में, एक नाम है। अब भी म्रू मौजूद हैं या नही इस बारे में विशेषज्ञ लोग निरुत्तर हैं। इस कहानी का म्रू, कोई आदिवासी नहीं है। यहाँ म्रू का समानार्थक शब्द ‘आजकल विरल’ है। म्रू वर्ग के लोगो के जीवन कि एक ऐसी कहानी लेखिका ने सुनाई है जो पाठक के रौंगटे खड़े कर देगी।
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