Shareephan Shareephan
Rated 4.6/5 based on 40 customer reviews
68 In stock
Product description: Shareephan is written by Saadat hasan manto and published by Vani prakashan. Buy Shareephan by Saadat hasan manto from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

HomeLiteratureShort Stories Shareephan

Your Review
Shareephan by Saadat hasan manto
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani prakashan
  • Pages: 86
  • Binding: Paperback (also in: Hardback)
  • Publication Date: 2012
  • ISBN: 9789350722879
  • Category: Short Stories
  • Related Category: Novella
  • MBIC: MMB894919

₹100
₹68 32%OFF

Enter pincode to check delivery option
CHECK
Generally Delivered in 3-5 days.


Buy Now Add to Cart Gift This Book
Author Synopsis
सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।
कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। इनकी कई रचनाओं का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।
मण्टो की ‘शरीफन’ ही एक ऐसी कहानी है जो कहानी नहीं एक जीता जागता दुःस्वप्न मालूम होती है। इस कहानी को पढ़ कर मुझे लगा कि मण्टो जो दो लड़कियों का बाप था, फसादों के दौरान किस तकलीफ में से गुज़रा होगा। एक आम आदमी जब निजी हादसे का शिकार होता है तो किस तरह समझ सोच को भुला कर दरिन्दगी पर उतर आता है और इसीलिए कहानी के अन्त में कासिम के प्रति गुस्सा नहीं आता, वरन उसकी अपार दयनीयता और विवशता के प्रति दुख और दया ही उपजती है। यही कहानी, जो एक साम्प्रदायिक लेखक के हाथों लिखी जा कर लोगों के जज़्बातों को भड़का सकती थी, मण्टो के हाथों से निकल कर बिलकुल उलटा असर डालती है-वह पाठकों को दहशत की ऐसी सर्द हालत में छोड़ जाती है कि वे संजीदा हो कर इस सारी स्थिति पर ग़ौर करने के लिए प्रेरित होते है , जब आदमी पशु से बेहतर नहीं होता।
Readers generally buy together
Related Books
Books from this Storefront view all