Saath Geet Ratna Saath Geet Ratna
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Product description: Saath Geet Ratna is written by Harivansh rai bachchan and published by Vani prakashan. Buy Saath Geet Ratna by Harivansh rai bachchan from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Saath Geet Ratna

by Harivansh rai bachchan


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Author Synopsis
जन्म: 27 नवम्बर, 1907। जन्म-स्थान: इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) सम्पूर्ण शिक्षा म्यूनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला, गवर्नमेंट कॉलेज, इलाहाबाद, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी तथा काशी विश्वविद्यालय में।

सृजनशील लेखन की शुरुआत 1929 से। प्रारम्भ में कुछ कहानियाँ भी। 1941 से 1952 तक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के लेक्चरर। 1952 से 1954 तक इंग्लैंड में रहकर यीट्स के काव्य पर शोधकार्य, फलस्वरूप कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की डिग्री। लौटकर पुनः पूर्व पद पर। फिर कुछ मास तक आकाशवाणी, इलाहाबाद में हिन्दी प्रोड्यूसर। इसके बाद 16 वर्षों तक दिल्ली - 10 वर्ष विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ तथा 6 वर्ष राज्यसभा के मनोनीत सदस्य।

निधन: 18 जनवरी 2003

रचनाएँ - मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा-निमन्त्रण, एकान्त संगीत,  आकुल अन्तर, सतरंगिनी, हलाहल , बंगाल का काल, खादी के फूल, सूत की माला, मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, धार के इधर-उधर, आरती और अंगारे, बुद्ध और नाचघर, त्रिभंगिमा, चार खेमे चौंसठ खूँटे, दो चट्टानें, बहुत दिन बीते, कटती प्रतिमाओं की आवाज, उभरते प्रतिमानों के रूप , जाल समेटा, अतीत की प्रतिध्वनियाँ, प्रारम्भिक रचनाएँ,  नयी से नयी पुरानी से पुरानी (काव्य-संग्रह), क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक (आत्मकथा-खण्ड), वास की डायरी (डायरी), कवियों में सौम्य सन्त, नए-पुराने झरोखे, टूटी-छूटी कड़ियाँ (आलोचना निबन्ध), खैयाम और शेक्सपीयर के अनुवाद, जन्मदिन की भेंट, बन्दर बाँट, नीली चिड़िया, प्रतिनिधि कवितायेँ, मेरी कविताई की आधी सदी, बच्चन रचनावली, खैयाम की मधुशाला, साठ गीत रत्न
पचासों बरस की जियी हुई उन तमाम यादों को आँचल में बाँधकर-बच्चन जी के विपुल काव्यसाहित्य के विशाल समुद्र में से ये साठ गीत रत्न निकाले हैं-किन्तु यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि इन गीतों को उनके काव्यसाहित्य का प्रतिनिधि न माना जाय। क्योंकि उनके काव्य के जो विविध स्तर और विभिन्न भावभूमियाँ हैं वह सभी इस संकलन में प्रतिबिम्बित नहीं हैं। इसमें तो केवल उनके वे गीत हैं जो गेय हैं और कवि सम्मेलनों में खूब सुने गये हैं। बच्चन जी ने लोकधुनों पर आधारित गीत लिखने का अभिनव प्रयोग किया था, लोकगीतों के रंग के वे गीत तथा कुछ साहित्यिक गीत ही प्रस्तुत पुस्तक में संकलित किए गये हैं। इसे उनके गीतों के प्रतिनिधि संकलन के रूप में ही समझा जाना होगा।
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