Visham Raag Visham Raag
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Product description: Visham Raag is written by Arun prakash and published by Rajkamal prakashan. Buy Visham Raag by Arun prakash from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Visham Raag

by Arun prakash


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Author Synopsis
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साहित्य के मौजूदा दौर में पाठ–सुख वाली कहानियाँ कम होती जा रही हैं । इस संकलन की कहानियों में पाठ–सुख भरपूर है । लेकिन यह सुख तात्कालिक नहीं है बल्कि ये निर्विवाद कहानियाँ देर तक स्मृति में बनी रहती हैं । लोकप्रियता और विचार–केन्द्रित कथा का मिजाज मुश्किल से मिलता है पर इन कहानियों मंे यह सुमेल इसलिए सम्भव हो पाया क्योंकि यहाँ पाठकों के प्रति गम्भीर सम्मान है । ये कहानियाँ पाठकों को उपभोक्ता नहीं, सहभोक्ताय श्रोता नहीं, सम्वादक बनने का अवसर देती हैं । इनमें विचार उपलाता नहीं, अन्तर्धारा की तरह बहता है, क्योंकि यह सृजन पाठक–लेखक सहभागिता पर टिका है । इस संकलन का कथा–क्षेत्र काफी खुला है । तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, बिहार, दिल्ली, पंजाब तक । नए–नए पेशे, नए दस्तकार हैं । ये जड़ परम्परा, नई परिस्थितियों से घिरे इनसानों की नाउम्मीदी, छोटी–छोटी उम्मीदों, कशमकशों, छटपटाहटों और उबरने की कोशिशों की कहानियाँ हैं । इनके चरित्रों में विभिन्न समुदायों, आस्थाओं, क्षेत्रों से आई स्त्रियाँ हैं जिनके दुख तो पुराने हैं पर उनसे टकराने के तरीके और सुख नए हैं । इनके झुग्गी–झोंपड़ी निवासी, आदिवासी, दलित और दस्तकार शाश्वत समस्याओं और बड़ी परिघटनाओं के भँवर में फँसे हैं । उनकी अदम्य जिजीविषा, राग–रंग और जिन्दगी से प्यार की कहानियों पर देश के आखिरी दो दशकों की छाया देखी जा सकती है । युग की प्रमुख आवाजों को सुरक्षित रखना इतिहास की जिम्मेवारी है, छोटी–छोटी अनुगूजों को सहेजना साहित्य की । मनुष्य विरोधी मूल्यों, सत्ताओं और संगठित संघर्षों की बड़ी उपस्थिति के बावजूद लघु, असंगठित और प्राय: व्यक्तिगत संघर्षों की बड़ी दुनिया है । इन कहानियों में उसी की अनुगूँजें हैं । ये कहानियाँ किसी एक शैली में नहीं बँधी हैं बल्कि हर कहानी का अलग और स्वतन्त्र व्यक्तित्व, नई भाषा, नई संरचना और आंतरिक गतिशीलता के सहारे निर्मित किया गया है । प्रयोगधर्मिता इन कहानियों का गुण तो है पर ये प्रयोग अटपटे या दिखावटी नहीं बल्कि सहज और स्वीकार्य हैं । कई पुरस्कारों से सम्मानित अरुण प्रकाश का यह पाँचवाँ संकलन है ।
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