Shaalgirah Ki Pukar Per Shaalgirah Ki Pukar Per
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Shaalgirah Ki Pukar Per

by Mahashweta devi





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Author Synopsis
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हिंदुस्तान में गोराशाही लूट पर टिकी थी । व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कंपनी ने लूट-व्यापार को स्थायी बनाने के लिए षड्‌यंत्र और सैनिक हस्तक्षेप के जरिए 1757 में प्लासी-युद्ध में जीत के बाद सत्‍ता हाथ में ले ली । मगर रियाया पर प्रभुत्व स्थापित करना आसान न था । गोरों के खिलाफ असंतोष फैलने लगा था । मुनाफे के लिए गोरे अकाल और भूख की तिजारत कर रहे थे । अपने शासन-क्षेत्र का विस्तार कर रहे थे । बिहार-बंगाल के जंगल के दावेदार संथालों से अपना लोहा मनवाने और उनकी स्वतंत्र-प्रवृत्ति पर काबू पाने के लिए गोरों ने जंगल-उत्पादों, धान-चावल की खरीद शुरू की । गोरों ने बाजार को हथियार बनाया । संथाल भड़क उठे और विद्रोह की कमान सँभाली संथाल परगना के आदि विद्रोही तिक्का माँझी ने ।
संथाल जीवन और गोरों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संग्राम की गाथा शाल-गिरह की पुकार में प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की प्रखर लेखनी से । यह न केवल इतिहास है बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव-स्मृति भी ।
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