Samvidhan Ki Padtal Samvidhan Ki Padtal
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Product description: Samvidhan Ki Padtal is written by Kanak tiwari and published by Vani prakashan. Buy Samvidhan Ki Padtal by Kanak tiwari from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Samvidhan Ki Padtal

by Kanak tiwari


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Author Synopsis
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भारत का संविधान मुझे छात्र जीवन से चैन से जीने नहीं देता। वह फलसफा है। करोड़ों भारतीयों का रुदन है। युवाओं की आँखों का स्वप्न है। उसमें अतीत के शिखर पुरुष हर वक्त अपनी कालजयी वाणी में कौंधते हैं। यह किताब हमारे जीवन का पथ, पथ प्रदर्शक और पाथेय सभी कुछ है। मैं इसकी डगर पर कहीं न कहीं पहुँचने के लिए चलता रहता हूँ। इस बाइस्कोप से जीवन को समझने के लिए मुझे न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती, न्यायमूर्ति जी. एल. ओझा, न्यायमूर्ति रमेश चन्द्र लाहोटी, न्यायमूर्ति देवदत्त माधव धर्माधिकारी, न्यायमूर्ति एस.बी. सिन्हा, न्यायमूर्ति अनंग कुमार पटनायक और अब न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा से समय-समय पर प्रेरणा मिली है। बुद्धिजीवी मित्रा स्व. दिलीप चित्रो, अभय कुमार दुबे, आदित्य निगम, उदयप्रकाश, पुरुषोत्तम अग्रवाल, रविभूषण, धु्रुव शुक्ल और स्व. शंकरगुहा नियोगी भी मेरी समझ को उलटते-पलटते रहे हैं। पुस्तक के भूमिकाकार और लेखक दोनों की अविचल समझ में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश तथा शलाका पुरुष स्वर्गीय हंसराज खन्ना की स्मृति ही हकदार है कि इस पुस्तक का सारा श्रम उनकी याद में न्यौछावर कर दिया जाए। आम आदमी के अधिकारों और सपनों के लिए संविधान की ताकत सहेजे उनसे बड़ी लड़ाई अब तक तो किसी ने नहीं लड़ी है।
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