Madhushala Madhushala
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Product description: Madhushala is written by Harivansh rai bachchan and published by Rajpal. Buy Madhushala by Harivansh rai bachchan from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Madhushala

by Harivansh rai bachchan

  • Language: Hindi
  • Publisher: Rajpal
  • Pages: 80
  • Binding: Hardback
  • ISBN: 9788170283447
  • Category: Poetry
  • Related Category: Literature
  • MBIC: MMB1858256835

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Author Synopsis
जन्म: 27 नवम्बर, 1907। जन्म-स्थान: इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) सम्पूर्ण शिक्षा म्यूनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला, गवर्नमेंट कॉलेज, इलाहाबाद, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी तथा काशी विश्वविद्यालय में।

सृजनशील लेखन की शुरुआत 1929 से। प्रारम्भ में कुछ कहानियाँ भी। 1941 से 1952 तक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के लेक्चरर। 1952 से 1954 तक इंग्लैंड में रहकर यीट्स के काव्य पर शोधकार्य, फलस्वरूप कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की डिग्री। लौटकर पुनः पूर्व पद पर। फिर कुछ मास तक आकाशवाणी, इलाहाबाद में हिन्दी प्रोड्यूसर। इसके बाद 16 वर्षों तक दिल्ली - 10 वर्ष विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ तथा 6 वर्ष राज्यसभा के मनोनीत सदस्य।

निधन: 18 जनवरी 2003

रचनाएँ - मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा-निमन्त्रण, एकान्त संगीत,  आकुल अन्तर, सतरंगिनी, हलाहल , बंगाल का काल, खादी के फूल, सूत की माला, मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, धार के इधर-उधर, आरती और अंगारे, बुद्ध और नाचघर, त्रिभंगिमा, चार खेमे चौंसठ खूँटे, दो चट्टानें, बहुत दिन बीते, कटती प्रतिमाओं की आवाज, उभरते प्रतिमानों के रूप , जाल समेटा, अतीत की प्रतिध्वनियाँ, प्रारम्भिक रचनाएँ,  नयी से नयी पुरानी से पुरानी (काव्य-संग्रह), क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक (आत्मकथा-खण्ड), वास की डायरी (डायरी), कवियों में सौम्य सन्त, नए-पुराने झरोखे, टूटी-छूटी कड़ियाँ (आलोचना निबन्ध), खैयाम और शेक्सपीयर के अनुवाद, जन्मदिन की भेंट, बन्दर बाँट, नीली चिड़िया, प्रतिनिधि कवितायेँ, मेरी कविताई की आधी सदी, बच्चन रचनावली, खैयाम की मधुशाला, साठ गीत रत्न
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