Hori Dhoom Machyo Ree Hori Dhoom Machyo Ree
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Product description: Hori Dhoom Machyo Ree is written by Sarveshwar dayal saxena and published by Vani prakashan. Buy Hori Dhoom Machyo Ree by Sarveshwar dayal saxena from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Hori Dhoom Machyo Ree by Sarveshwar dayal saxena
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani prakashan
  • Pages: 48
  • Binding: Hardback
  • ISBN: 9788170554813
  • Category: Drama
  • Related Category: Drama & Theatre
  • MBIC: MMB396883

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Author Synopsis
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना मूलतः कवि एवं साहित्यकार थे, पर जब उन्होंने दिनमान का कार्यभार संभाला तब समकालीन पत्रकारिता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को समझा और सामाजिक चेतना जगाने में अपना अनुकरणीय योगदान दिया। सर्वेश्वर मानते थे कि जिस देश के पास समृद्ध बाल साहित्य नहीं है, उसका भविष्य उज्ज्वल नहीं रह सकता। सर्वेश्वर की यह अग्रगामी सोच उन्हें एक बाल पत्रिका के सम्पादक के नाते प्रतिष्ठित और सम्मानित करती है।

15 सितम्बर सन् 1927 को उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले में जन्मे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना तीसरे सप्तक के महत्वपूर्ण कवियों में से एक हैं। वाराणसी तथा प्रयाग विश्वविद्यालय से शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत आपने अध्यापन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य किया। आप आकाशवाणी में सहायक निर्माता; दिनमान के उपसंपादक तथा पराग के संपादक रहे। यद्यपि आपका साहित्यिक जीवन काव्य से प्रारंभ हुआ तथापि ‘चरचे और चरखे’ स्तम्भ में दिनमान में छपे आपके लेख ख़ासे लोकप्रिय रहे। सन् 1983 में आपको अपने कविता संग्रह ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। आपकी रचनाओं का अनेक भाषाओं में अनुवाद भी हुआ। कविता के अतिरिक्त आपने कहानी, नाटक और बाल साहित्य भी रचा। 24 सितम्बर 1983 को हिन्दी का यह लाडला सपूत आकस्मिक मृत्यु को प्राप्त हुआ।

‘काठ की घाटियाँ’, ‘बाँस का पुल’, ‘एक सूनी नाव’, ‘गर्म हवाएँ’, ‘कुआनो नदी’, ‘कविताएँ-1’, ‘कविताएँ-2’, ‘जंगल का दर्द’ और ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ आपके काव्य संग्रह हैं।

‘उड़े हुए रंग’ आपका उपन्यास है। ‘सोया हुआ जल’ और ‘पागल कुत्तों का मसीहा’ नाम से अपने दो लघु उपन्यास लिखे। ‘अंधेरे पर अंधेरा’ संग्रह में आपकी कहानियाँ संकलित हैं। ‘बकरी’ नामक आपका नाटक भी खासा लोकप्रिय रहा। बालोपयोगी साहित्य में आपकी कृतियाँ ‘भौं-भौं-खों-खों’, ‘लाख की नाक’, ‘बतूता का जूता’ और ‘महंगू की टाई’ महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। ‘कुछ रंग कुछ गंध’ शीर्षक से आपका यात्रा-वृत्तांत भी प्रकाशित हुआ। इसके साथ-साथ आपने ‘शमशेर’ और ‘नेपाली कविताएँ’ नामक कृतियों का संपादन भी किया।
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