Geet farosh : Samvedana Aur Shilp Geet farosh : Samvedana Aur Shilp
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Product description: Geet farosh : Samvedana Aur Shilp is written by Dr.smita mishra and published by Vani prakashan. Buy Geet farosh : Samvedana Aur Shilp by Dr.smita mishra from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Geet farosh : Samvedana Aur Shilp by Dr.smita mishra
  • Language: Hindi
  • Publisher: Vani prakashan
  • Pages: 96
  • Binding: Hardback
  • Publication Date: 2013
  • ISBN: 9788170553649
  • Category: Reference Work
  • Related Category: Reference & Research
  • MBIC: MMB370663

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Author Synopsis
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गीतफरोश से संवेदना सहज और व्यापक है। भवानीप्रसाद मिश्र किसी बाद में सिमटकर चलने वाले संकीर्ण कवि नहीं हैं। वे खुले हुए कवि हैं। बाहर मनुष्य और प्रकृति का जो भी रूप उन्हें प्रभावित करता है उसे खुली आँखों से देखते हैं और उसके साथ एक सहज रागात्मक लगाव निर्मित कर लेते हैं। इसे हम यों भी कह सकते हैं कि उन्हें मुनष्य और प्रकृति से गहरा प्यार है। उस प्यार में एक खुलापन है एक गति है। इस तरह इनकी कविताओं में मनुष्य और प्रकृति का एक ओर विविध रूपविधान है तो दूसरी ओर उससे जुड़ी हुई विविध रागात्मक प्रतिक्रियाएँ। यानी सौन्दर्य का भीतरी और बाहरी संसार एक-दूसरे से संवाद करता हुआ चलता रहता है। मिश्रजी अपने समय के प्रति सचेत कवि हैं। अतः उनमें सामाजिक और राजनीतिक प्रश्नों से जुड़ा हुआ चिन्तन भी चलता रहता है। वे गाँधीवादी दर्शन से प्रभावित कवि हैं। इसीलिए उनकी राजनीतिक और सामाजिक चिन्तन के केन्द्र में सामान्य मनुष्य का हित रहता है। यानी सामान्य मनुष्य के सुख-दुख को केन्द्र में रखने के कारण उनकी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि मूल्य-दृष्टि बन जाती है। भवानी भाई लोक-प्रकृति, लोक-जीवन से जुड़े हुए कवि हैं। अतः उनमें लोक-जीवन की सांस्कृतिक-चेतना तथा यथार्था छवियों के दर्शन होते हैं।
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