Ek Maheena Nazmon Ka Ek Maheena Nazmon Ka
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Product description: Ek Maheena Nazmon Ka is written by Irshad kamil and published by Vani prakashan. Buy Ek Maheena Nazmon Ka by Irshad kamil from markmybook.com. An online bokstore for all kind of fiction, non fiction books and novels of English, Hindi & other Indian Languages.

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Ek Maheena Nazmon Ka

by Irshad kamil


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Author Synopsis
इरशाद कामिल : पंजाब के छोटे से कस्बे मलेरकोटला में जन्म। पंजाब विश्वविद्यालय से समकालीन हिन्दी कविता पर पीएच. डी. उपाधि। दी ट्रिब्यून समाचार पत्र समूह और इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्रा समूह में नौकरियाँ। वर्ष 2001 में सब छोड़-छाड़ कर मुम्बई रवानगी। मुम्बई फिल्म उद्योग में पहली पंक्ति के गीतकार। दो फिल्म फेयर अवार्ड्स के अलावा, स्क्रीन, आइफा, जी सिने, अप्सरा, जीमा, मिर्ची म्यूजिक, बिग एंटरटेनमेंट और ग्लोबल इंडियन फिल्म एवं टीवी अवार्ड जैसे लगभग सभी फिल्मी पुरस्कार प्राप्त। विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं और कहानियों का प्रकाशन तथा ‘क्या सम्बन्ध था सड़क का उड़ान से’ शीर्षक अधीन छपे चौदह कवियों के सामूहिक संग्रह में शामिल। समकालीन कविता पर आलोचनात्मक पुस्तक ‘समकालीन कविता: समय और समाज’ भी प्रकाशित।
अमूमन ऐसा होता है कि किसी की मोहब्बत का जिक्र, जिसमें मासूमियत और सच्चाई साफ झलकती हो, सुनते ही दर्शक, श्रोता या फिर पाठक, अपनी मोहब्बत के दौर में पहुंच जाते हैं. शायद इसलिए कि हर इंसान अपनी जिंदगी के उस दौर में बार-बार लौटकर जाना चाहता है. कुछ इसी भावना के साथ ‘एक महीना नज़्मों का’ की नज़्मों को भी बार-बार पढ़ते चले जाने का मन होता है. इस नज़्म संग्रह में इरशाद कामिल की रोमानी डायरी की नज़्में दर्ज हैं. लगभग सभी नज़्में प्रेम के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं. इरशाद ऐसे अदभुत कलमनवीस हैं जिनके दिल में जकड़न के खिलाफ आग और प्रेम की ऊष्मा एक साथ रहती है. इरशाद के भीतर की यह आग उनके गानों में साफ दिखती है. खासतौर से रॉकस्टार फिल्म के उस गाने में ‘तुम लोगों की इस दुनिया में हर कदम पे इंसां गलत... मतलब कि तुम सबका मुझ पर मुझसे भी ज्यादा हक है.’ जहां तक इस किताब की बात है इन नज्मों में वे खुद को ऐसे प्रेमी के रूप में देखते हैं जिसने हमेशा प्रेम किया है और सबसे किया है - ‘जब से दुनिया बनी है मैं मोहब्बत करता आ रहा हूं और जब तक रहेगी मोहब्बत करता रहूंगा... आजकल भी तो मैं घूमता हूं हर गली-मोहल्ले में आशिक बनकर.’
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